लखनऊ में दर्दनाक हादसा: मां की डांट से नाराज़ होकर इकलौती बेटी ने की आत्महत्या
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक बेहद दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक परिवार की इकलौती 17 वर्षीय बेटी ने आत्महत्या कर ली। इंटरमीडिएट की छात्रा ने अपने कमरे में फांसी लगाकर जीवनलीला समाप्त कर दी। बताया जा रहा है कि घटना से कुछ समय पहले मां ने उसे मोबाइल चलाने को लेकर डांट लगाई थी, जिससे वह नाराज़ होकर अपने कमरे में चली गई थी।
पढ़ाई में मन नहीं लग रहा था, मां ने लगाई थी फटकार
परिजनों के अनुसार, छात्रा पिछले कुछ समय से पढ़ाई पर कम ध्यान दे रही थी और मोबाइल फोन पर ज़्यादा समय बिता रही थी। इसे लेकर मां ने नाराज़गी जताई और उसे पढ़ाई पर ध्यान देने को कहा। डांट के बाद वह चुपचाप अपने कमरे में चली गई और दरवाजा बंद कर लिया।
कुछ देर बाद जब परिजनों ने उसे आवाज़ लगाई और कोई जवाब नहीं मिला, तो दरवाजा तोड़कर देखा गया कि वह पंखे से लटकी हुई थी। इस दृश्य को देखकर घर में कोहराम मच गया।
मौके पर पहुंची पुलिस, आत्महत्या की जांच जारी
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। थाना प्रभारी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह आत्महत्या का मामला प्रतीत हो रहा है और पारिवारिक कारणों को संभावित वजह माना जा रहा है, लेकिन सभी पहलुओं से जांच की जा रही है।
पड़ोसियों ने बताई होशियार और शांत स्वभाव की लड़की
पड़ोसियों के अनुसार, मृतक लड़की पढ़ाई में तेज और बेहद शांत स्वभाव की थी। वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान थी। उसकी असमय मृत्यु से परिवार पर गहरा मानसिक आघात पड़ा है, और पूरा मोहल्ला शोक में डूबा हुआ है।
मानसिक स्वास्थ्य पर फिर उठे सवाल
यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक समझ को लेकर समाज में कितनी जागरूकता की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि—
- अभिभावकों को बच्चों से संवाद बनाए रखना चाहिए।
- पढ़ाई और अनुशासन ज़रूरी है, लेकिन उससे भी ज़्यादा ज़रूरी है भावनात्मक जुड़ाव और सहानुभूति।
- किशोर अवस्था में बच्चों का मन अस्थिर होता है, ऐसे में डांट-फटकार की जगह समझदारी और धैर्य से काम लेना चाहिए।















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