भोपाल। 14 मई 2016 की दोपहर, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के कामती जंगल में जब पुलिस और मजदूरों की एक टीम एक पुराने बरसाती नाले के किनारे गड्ढा खोद रही थी, तब किसी को अंदाज़ा नहीं था कि यह मामला पूरे प्रदेश को हिला देगा। थोड़ी ही देर में वहां से जो शव निकला, वह 15 दिन से लापता अमेरिकी दूतावास की कर्मचारी लीना शर्मा का था – नग्न, अधसड़ा हुआ और नमक-यूरिया में दबा हुआ।
यह कोई साधारण मर्डर केस नहीं था, बल्कि एक ब्लाइंड मर्डर मिस्ट्री थी, जिसमें न सुराग थे, न चश्मदीद, और शक के घेरे में था एक राजनीतिक रसूख वाला व्यक्ति – खुद लीना का सगा मामा।
लीना की गुमशुदगी और सोशल मीडिया पर ‘सेव लीना’
28 अप्रैल 2016 की सुबह लीना भोपाल से निकली और फिर लौटकर नहीं आई। उसका मोबाइल बंद हो गया और दूतावास में अनुपस्थित रहने पर उसकी दोस्त ने पुलिस कंट्रोल रूम में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। यह खबर सिर्फ स्थानीय पुलिस तक सीमित नहीं रही, बल्कि राजधानी तक पहुंच गई।
लीना के दोस्तों ने सोशल मीडिया पर #SaveLeena नाम से एक कैंपेन चलाया, जिसमें लीना के मामा प्रदीप शर्मा पर शक जताया गया। उन पर पहले से ही जमीन विवाद का आरोप था।
मोबाइल से खुली कहानी की पहली परत
पुलिस को लीना का मोबाइल एक युवक के पास मिला, जिसने बताया कि उसे यह विंध्याचल एक्सप्रेस में मिला था। मोबाइल से निकाली गई कॉल डिटेल्स ने एक नया सुराग दिया। आखिरी कॉल एक ऑटो चालक का था, जिसने बताया कि 29 अप्रैल की सुबह उसने लीना को डूडादेह गांव में खेत के पास छोड़ा था।
यह जानकारी गुमशुदगी की तारीख (28 अप्रैल) से मेल नहीं खाती थी, जिससे संदेह गहराया।
तारबंदी विवाद बना हत्याकांड की वजह
डूडादेह गांव में पुलिस ने डेनियल प्रकाश से पूछताछ की, जिसने बताया कि लीना ने खेत में तार फेंसिंग का ठेका प्रताप उर्फ फतेह सिंह को दिया था। 29 अप्रैल को जब वह साइट पर पहुंची, तो वहां उसका मामा प्रदीप शर्मा आ गया और काम रुकवाने लगा।
यह विवाद आखिरकार जानलेवा बन गया।
गिरफ्त में आए दो नौकर – कबूल किया कत्ल
पुलिस ने जब मामले की गहराई से जांच की, तो प्रदीप शर्मा के दो नौकर गोरेलाल और राजेंद्र – शक के घेरे में आए। पूछताछ में उन्होंने पहले अनजान बनने की कोशिश की, मगर पुलिस की सख्ती में टूट गए।
उन्होंने बताया कि विवाद के बाद लीना की हत्या कर दी गई थी और फिर उसकी लाश को सतपुड़ा के जंगल में ले जाकर दफना दिया गया। पहचान मिटाने के लिए लाश पर नमक और यूरिया डाला गया था।
सबूत: जलाए गए कपड़े, चार्जर, ईयरफोन
गिरफ्तार आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस को लीना की जली हुई जींस, पर्स, टूटा हुआ बटन, मोबाइल चार्जर और ईयरफोन मिले।
लीना के शव की पहचान उसकी सहेली ने उसके बाल, नाखून और ब्रेसलेट से की। हालांकि, बड़ी बहन हेमा मिश्रा ने शव की पहचान करने से इनकार कर दिया। डीएनए टेस्ट से पुष्टि की गई कि शव लीना शर्मा का ही था।
हत्या की वजह सिर में लगी गहरी चोट
तीन डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमॉर्टम कराया गया। रिपोर्ट के अनुसार, लीना के सिर में गहरी चोट आई थी जिससे फ्रैक्चर हुआ और उसकी मौत हो गई। हालांकि, रेप की पुष्टि नहीं हुई।
राजनीतिक रसूख ने की जांच में बाधा
लीना के मामा प्रदीप शर्मा का राजनीतिक प्रभाव जांच में बड़ी अड़चन बना। उनके खिलाफ कोई गवाही देने को तैयार नहीं था। हालांकि नौकरों की गिरफ्तारी और मोबाइल रिकॉर्ड्स ने पूरे केस की गुत्थी सुलझा दी।
अब तक क्या हुआ?
- प्रदीप शर्मा पर हत्या की साजिश का शक, मगर वह सीधे तौर पर आरोपी नहीं बना।
- गोरेलाल और राजेंद्र जेल में बंद, केस न्यायिक प्रक्रिया में है।
- लीना के दोस्तों ने लंबे समय तक न्याय की लड़ाई लड़ी, लेकिन यह केस नौ साल बाद भी कई सवालों के जवाब मांगता है।













Leave a Reply