कहते हैं कि पत्रकार सिर्फ खबरें नहीं लिखते, कभी-कभी तूफान भी खड़ा कर देते हैं। ताज़ा मामला देखिए—रॉयल प्रेस क्लब की शिकायत पर मध्यप्रदेश का आबकारी विभाग जाग गया है। वही विभाग जिसे जागने में आमतौर पर तीन साल, चार घूंट और सात रिमाइंडर लग जाते हैं।
इस बार निशाने पर है एक ऐसा शराब कारोबारी, जिसकी सल्तनत में बोतलें तो खुलती थीं, पर हिसाब की किताबें हमेशा बंद रहती थीं। आरोप है—पूरे 13 करोड़ का घोटाला! यानी इतनी रकम कि उसमें आधा मोहल्ला 10 साल तक फ्री में जाम टकरा ले।
शिकायत आई, विभाग के पन्ने खड़खड़ाए, और फिर निकला एक ‘चिट्ठी’ जो देखने में सरकारी है पर असर में पूरा धमाका। दस्तावेज़ के मुताबिक, शराब कारोबारी पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है—लेकिन 22 अप्रैल के बाद!
जिस व्यापारी की बोतलें सबके गले से नीचे उतरती थीं, अब उसके गले की फांस बन चुकी है एक पत्रकार की शिकायत। शायद यही है ‘लोकतंत्र का असली नशा’।
तो बस अब इंतज़ार कीजिए, अगली बड़ी कार्रवाई की खबर किसी भी वक्त आ सकती है। तब तक ‘द न्यूज़ एनालिसिस’ की काना-फूसी पढ़ते रहिए, क्योंकि हम फुसफुसाकर सच बताते हैं।













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