भोपाल। मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार एक बार फिर अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के संवैधानिक अधिकारों को लेकर विपक्ष के निशाने पर है। प्रदेश में गोरकेला ड्राफ्ट को लेकर सियासी भूचाल आ गया है। यह ड्राफ्ट वर्ष 2017 में तत्कालीन शिवराज सरकार द्वारा तैयार किया गया था, जो पदोन्नति में आरक्षण से जुड़ा है। कांग्रेस का आरोप है कि यह ड्राफ्ट सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और संविधान के प्रावधानों के अनुरूप होते हुए भी आज तक कैबिनेट में नहीं लाया गया, जिससे लाखों SC/ST अधिकारी और कर्मचारी वर्षों से प्रमोशन से वंचित हैं। कांग्रेस ने प्रदीप अहिरवार ने कहा, की प्रदेश जे मुख्य सचिव अनुराग जैन दलित-आदिवासी विरोधी हैं, वह SC/ST वर्ग के अधिकारियों को सामाजिक न्याय से वंचित कर रहे हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में गरजे SC कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार
राजधानी भोपाल में शनिवार को आयोजित प्रेस वार्ता में अनुसूचित जाति कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने मुख्य सचिव अनुराग जैन को दलित विरोधी करार देते हुए कहा कि वे पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर SC/ST वर्ग के अधिकारियों के अधिकारों को दबा रहे हैं। अहिरवार ने आरोप लगाया कि आज प्रदेश का प्रशासन मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि मंत्रालय की ऊपरी मंजिलों पर बैठे नौकरशाह चला रहे हैं।
“मुख्यमंत्री को बताना चाहिए—क्या उन्हें गोरकेला ड्राफ्ट की जानकारी है?”
प्रदीप अहिरवार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से सीधा सवाल करते हुए पूछा कि यदि उन्हें गोरकेला ड्राफ्ट की जानकारी है, तो इसे अब तक कैबिनेट में क्यों नहीं लाया गया? और यदि जानकारी नहीं है, तो यह और भी चिंता का विषय है कि इतनी महत्वपूर्ण फाइल मुख्यमंत्री के संज्ञान में ही नहीं लाई जा रही।
“यह केवल चुनावी राजनीति नहीं, सामाजिक न्याय की बात है”
अहिरवार ने कहा कि प्रदेश सरकार केवल चुनावों के समय SC/ST समुदाय को वोट बैंक के रूप में देखती है। उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय में कार्यरत SC/ST अधिकारियों की संख्या सार्वजनिक करने की मांग की और सवाल उठाया कि क्या यह सरकार वाकई सामाजिक समावेशन और प्रतिनिधित्व की पक्षधर है?
गोरकेला ड्राफ्ट को बताया सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों पर आधारित
SC कांग्रेस अध्यक्ष ने बताया कि गोरकेला ड्राफ्ट सुप्रीम कोर्ट के ‘एम. नागराज बनाम भारत सरकार’ मामले में दिए गए निर्देशों पर आधारित है। यह एक वैधानिक, मजबूत और न्यायपूर्ण प्रारूप है जो प्रशासनिक दक्षता के साथ-साथ सामाजिक न्याय सुनिश्चित करता है। इस ड्राफ्ट के लागू होने से वर्षों से पदोन्नति से वंचित लाखों कर्मचारी लाभान्वित हो सकते हैं।
हालिया प्रमोशन फॉर्मूले को बताया असंवैधानिक
अहिरवार ने राज्य सरकार द्वारा हाल ही में घोषित प्रमोशन फॉर्मूले को अधूरा, अस्थायी और असंवैधानिक बताया। उन्होंने कहा कि जब खुद सरकार कह रही है कि यह फॉर्मूला सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अधीन है, तो फिर वह पहले से इसके कानूनी संकट को क्यों नहीं दूर कर रही? क्या यह महज एक झांसा है, समाज को गुमराह करने की एक रणनीति?
SC कांग्रेस की तीन प्रमुख माँगें
- गोरकेला ड्राफ्ट को तत्काल कैबिनेट में लाकर लागू किया जाए।
- मुख्यमंत्री स्पष्ट करें कि ड्राफ्ट अब तक कैबिनेट में क्यों नहीं लाया गया और इसकी जिम्मेदारी किसकी है।
- जिन अधिकारियों ने इस ड्राफ्ट को रोका, उनके खिलाफ जांच कर कार्रवाई की जाए।
अहिरवार की चेतावनी: अब संघर्ष जिले-जिले तक फैलेगा
प्रेस वार्ता के अंत में प्रदीप अहिरवार ने सरकार को सख्त चेतावनी दी कि यदि अगले सप्ताह के भीतर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो यह आंदोलन केवल एक राजनीतिक संघर्ष नहीं रहेगा, बल्कि यह सामाजिक क्रांति की लड़ाई बनेगा। उन्होंने कहा कि SC/ST वर्ग को उनके संवैधानिक अधिकार दिलाने के लिए हर जिले की सड़क पर संघर्ष किया जाएगा और यह तब तक जारी रहेगा जब तक न्याय नहीं मिल जाता।
अंबेडकर जयंती से पहले सरकार पर हमला
यह बयान उस समय आया है जब प्रदेशभर में संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती की तैयारियां चल रही हैं। ऐसे में सरकार पर संविधान के मूल्यों को दरकिनार करने का आरोप लगाकर SC कांग्रेस ने न सिर्फ दबाव बढ़ाया है, बल्कि एक बड़ा सामाजिक-राजनीतिक संदेश भी देने की कोशिश की है।
विश्लेषण: क्या यह बनेगा चुनावी मुद्दा?
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि सरकार इस मसले को जल्द नहीं सुलझाती, तो यह आने वाले नगर निकाय और पंचायत चुनावों में बड़ा मुद्दा बन सकता है। SC/ST वर्ग के बीच असंतोष पहले से ही गहरा है और अगर यह मुद्दा गर्माया रहा, तो विपक्ष इसे एक बड़े आंदोलन में बदल सकता है।
गोरकेला ड्राफ्ट को लेकर कांग्रेस द्वारा छेड़ी गई यह मुहिम अब केवल फाइलों और दफ्तरों की लड़ाई नहीं रही। यह अब सड़क से सदन तक पहुंचने की तैयारी में है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनकी सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं।













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