5 साल पहले गैंगरेप के बाद नाबालिग ने की थी आत्महत्या: अब कोर्ट ने सौतेले पिता को किया बरी, पुलिस पर उठे गंभीर सवाल

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भोपाल। अयोध्या नगर थाना क्षेत्र में 17 वर्षीय नाबालिग लड़की द्वारा आत्महत्या किए जाने के पांच साल बाद कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) कुमुदिनी पटेल ने न सिर्फ पीड़िता के सौतेले पिता को आरोपमुक्त करार दिया, बल्कि तत्कालीन टीआई महेन्द्र सिंह कुल्हारा के खिलाफ कार्रवाई और मामले की दोबारा जांच के आदेश डीजीपी को दिए हैं।

क्या है मामला?

14 जून 2018 को 17 वर्षीय लड़की ने आत्महत्या कर ली थी। पोस्टमॉर्टम के दौरान उसके कपड़ों में एक पर्ची मिली, जिसमें चार लोगों—बोधिनी, मुबीन खान, राजू और यादव—के नाम और मोबाइल नंबर लिखे थे। डीएनए रिपोर्ट में यह साफ हुआ कि लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ था।

इसके बावजूद पुलिस ने असली आरोपियों को पकड़ने के बजाय दो गवाहों के बयानों के आधार पर लड़की के सौतेले पिता के खिलाफ 20 मई 2019 को एफआईआर दर्ज की और 9 नवंबर 2019 को उन्हें गिरफ्तार कर लिया। वह करीब 13 महीने तक जेल में रहे।

कोर्ट का आदेश

कोर्ट ने सौतेले पिता को सभी आरोपों से बरी करते हुए कहा कि—

“गवाह अपने बचाव में गलत बयान दे सकते हैं।”

दरअसल, पड़ोस में रहने वाले दो पुलिस गवाहों ने कहा था कि लड़की बताती थी कि उसका सौतेला पिता उसके साथ गलत व्यवहार करता था। अदालत ने पाया कि घटना से तीन-चार दिन पहले लड़की उन्हीं गवाहों के घर पर थी और वहीं से घर लौटी थी। अदालत ने संदेह जताया कि ये गवाह खुद को बचाने के लिए गलत बयान दे सकते हैं।

पिता का बयान: “पुलिस ने मेरी ज़िंदगी तबाह कर दी”

सौतेले पिता ने बताया कि घटना के समय वह करोंद इलाके की एक निर्माणाधीन बिल्डिंग में काम कर रहे थे। बेटी की मौत की सूचना मिलने पर घर पहुंचे और कुछ समय बाद दिल्ली चले गए। वहीं से उन्हें बुलाकर गिरफ्तार किया गया। उन्होंने बताया कि जेल जाने के बाद उनका फर्नीचर का कारोबार पूरी तरह बर्बाद हो गया। अब वे मकान किराए पर देकर ससुराल में पत्नी के साथ रह रहे हैं।

मां का आरोप: “पुलिस ने 50 हजार की मांग की थी”

पीड़िता की मां ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि—

“अयोध्या नगर थाने के तत्कालीन एसआई देवेंद्र ने केस रफा-दफा करने के लिए 50 हजार रुपये की मांग की थी। उसने कहा था कि ये पैसे टीआई साहब के कहने पर मांगे जा रहे हैं। मेरे पास उस वक्त केवल 5,000 रुपये थे, जो उसने लेने से मना कर दिया। उसने मुझे पैसे देने के लिए थाने के पास की चाय की दुकान पर बुलाया था।”

सबसे बड़ा सवाल: क्या अब मिलेंगे असली दोषी?

पोस्टमॉर्टम के दौरान मिली पर्ची और डीएनए रिपोर्ट में स्पष्ट होने के बावजूद, पुलिस ने जिन चार नामों की ओर संकेत किया था, उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई अब तक नहीं हुई है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पांच साल की लापरवाही के बाद अब पुलिस असली दोषियों को पकड़ पाएगी?

 


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