संघर्ष से सफलता तक : बबली अहिरवार मेश्राम की कहानी, जो बनी हज़ारों महिलाओं की प्रेरणा

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बबली अहिरवार मेश्राम की कहानी, जो बनी हज़ारों महिलाओं की प्रेरण

भोपाल। “अगर हम खुद को सक्षम बनाएंगे, तो समाज भी हमें स्वीकार करेगा।” यह कहना है बबली अहिरवार मेश्राम का—एक ऐसी महिला जिनका जीवन संघर्ष, साहस और सफलता की मिसाल है। आज वे एक सफल सेलेब्रिटी मेकअप आर्टिस्ट हैं, लेकिन उनका यह सफर आसान नहीं रहा। गरीबी, सामाजिक सीमाओं के बावजूद उन्होंने न केवल खुद को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि हज़ारों महिलाओं को भी सशक्त बनने की राह दिखाई।

संघर्षों में बचपन और शिक्षा का सपना

बबली का जन्म एक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। उनके पिता लक्ष्मण अहिरवार सब्ज़ी बेचकर परिवार का पेट पालते थे। छह बहनों में दूसरे नंबर की बबली बचपन से ही पढ़ाई में रुचि रखती थीं, लेकिन संसाधनों की कमी और जातीय भेदभाव उनके रास्ते में दीवार की तरह खड़े थे। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी।

उनके भीतर शिक्षा के प्रति ऐसा जुनून पैदा किया, जिसने उनके पूरे जीवन को दिशा दी। वे मानती हैं कि डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों से प्रेरणा लेकर ही वे बार-बार गिरकर भी उठती रहीं।

ससुराल में मिली नई पहचान

2011 में उनकी शादी प्रवीण मेश्राम से हुई, जो तब कॉलेज में पढ़ रहे थे। इस रिश्ते ने बबली को न केवल भावनात्मक सहयोग दिया, बल्कि उनके सपनों को उड़ान भी दी। खासकर उनकी सास, हेमलता मेश्राम, जिन्होंने बबली के अंदर छुपी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

बबली बताती हैं कि जब वे गर्भवती थीं, तब डॉक्टर ने उन्हें बेड रेस्ट की सलाह दी थी। लेकिन उनकी बेचैनी देखकर सास ने उन्हें 1500 रुपये की मेकअप किट लाकर दी। यहीं से उनके सफर की असली शुरुआत हुई।

घर के कमरे से पार्लर तक का सफर

बबली ने अपने घर के एक छोटे से कमरे में पार्लर की शुरुआत की। शुरुआती दिन चुनौतीपूर्ण थे—कम ग्राहक, सीमित संसाधन, और सामाजिक ताने। लेकिन मेहनत, लगन और परिवार के सहयोग से बबली ने धीरे-धीरे सफलता की सीढ़ियाँ चढ़नी शुरू कीं। 2016 में उन्होंने एक निजी कॉलेज में पढ़ाने का कार्य भी शुरू किया और साथ ही पार्लर भी चलाती रहीं।

उनकी पहली कमाई महज 500 रुपये थी, लेकिन बबली के लिए यह किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं थी। वे कहती हैं, “वह मेरी मेहनत और आत्मसम्मान की पहली जीत थी।”

मोनिका शर्मा बनीं मार्गदर्शक

बबली की सफलता में ग्रैंड ब्यूटी अवार्ड (GBA) की डायरेक्टर मोनिका शर्मा का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। मोनिका ने बबली की प्रतिभा को पहचान कर उन्हें राष्ट्रीय मंच पर लाने का कार्य किया। उन्होंने बबली को कई सेलेब्रिटीज़ के मेकअप करने के अवसर दिलवाए और साथ ही उन्हें सेमिनार में ट्रेनर बनने का अवसर भी दिया।

मोनिका कहती हैं, “हमें समाज की उन महिलाओं की जरूरत है जो दूसरों को प्रेरित करें। डॉ. अंबेडकर के विचारों को ज़मीन पर लाने का काम यही महिलाएं कर रही हैं।”

हजारों महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर

बबली आज न केवल खुद आत्मनिर्भर हैं, बल्कि वे अपने पार्लर में अन्य महिलाओं को मेकअप की ट्रेनिंग भी दे रही हैं। वे कहती हैं, “हर महिला में आत्मनिर्भर बनने की क्षमता जन्मजात होती है, बस उसे पहचानने और संवारने की जरूरत है।”

हाल ही में भोपाल में आयोजित मेकअप सेमिनार में उन्होंने मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात और महाराष्ट्र से आई लगभग 400 महिलाओं को प्रशिक्षण दिया। उनके लिए यह केवल सौंदर्य सिखाने का मंच नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का संदेश देने का माध्यम था।

परिवार बना ताकत

बबली के पति प्रवीण मेश्राम हर कदम पर उनके साथ खड़े रहे। वे कहते हैं, “मुझे हमेशा यकीन था कि बबली कुछ बड़ा करेगी। आज हमारा पूरा परिवार उस पर गर्व करता है।”

बबली आज दो बेटियों की माँ हैं और मानती हैं कि शिक्षा और संघर्ष ही सामाजिक बेड़ियों को तोड़ने के हथियार हैं। वे कहती हैं, “जब मैं महिलाओं को आत्मनिर्भर बनते देखती हूं, तो लगता है मेरा संघर्ष सफल रहा। अगर मेरी कहानी एक महिला को भी प्रेरित करती है, तो यही मेरी सबसे बड़ी जीत है।”

अपनी सभी बहनों के साथ बबली अहिरवार मेश्राम

प्रेरणा की मिसाल

बबली अहिरवार मेश्राम आज हज़ारों महिलाओं के लिए एक प्रेरणा हैं। उनकी कहानी बताती है कि संघर्ष कितने भी बड़े क्यों न हों, अगर मन में कुछ कर गुजरने की चाह हो, तो कोई भी मंज़िल दूर नहीं।

भोपाल के हालिया मेकअप सेमिनार में उन्होंने जो सिखाया, वह सिर्फ मेकअप की तकनीक नहीं थी—वह एक क्रांति थी, जो हर महिला को यह एहसास दिलाती है कि आत्मनिर्भरता की राह उसी के भीतर से निकलती है।

 


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