राजधानी की फिजाओं में इन दिनों कुछ अलग ही खिचड़ी पक रही है। चाय की थड़ियों से लेकर व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी तक, हर चर्चा का केंद्र – “क्या सूबे के सरदार अपनी पारी पूरी कर पाएंगे?”
अब हाल ये है कि सरदार जी के सबसे करीबी, जो कभी उनकी आंखों के इशारे से समझ जाते थे, अब नजरें चुरा रहे हैं। जब उनके परम विश्वस्त ने किनारा किया, तो एक जानकार ने कहा – “अब तो AI भी कह रहा है कि इनकी वफादारी का डेटा corrupt हो गया है!”
विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि सरदार जी के पास कान तो हैं, पर कोई स्पैम फ़िल्टर नहीं। जो सबसे तेज बोले, वही नीति बन जाती है। एक वरिष्ठ अफसर ने दबी आवाज़ में कहा – “हम सुबह तक योजना बना लेते हैं, लेकिन अगर शाम तक कोई और ‘भरोसेमंद’ आ गया, तो पूरा खाका बदल जाता है।”
ज्योतिषी भी अब हथियार डाल चुके हैं। एक पंडित जी बोले – “इनका कुंडली मिलान तो ठीक है, पर जो ग्रह इनके चारों ओर चक्कर काट रहे हैं, वही सर्वाधिक प्रभावशाली हैं – और सबसे ज्यादा उलझाऊ भी!”
अब असली सवाल यह नहीं रह गया है कि सरदार जी कार्यकाल पूरा करेंगे या नहीं… सवाल ये है – अगर कर भी लिया, तो जनता उन्हें याद किस बात के लिए रखेगी?
“द न्यूज एनालिसिस” की काना-फूसी में पढ़ते रहिए, सत्ता के गलियारों से छनकर आई वो बातें, जो दिखती कम हैं, सुनाई ज़्यादा देती हैं।













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