चंबल-ग्वालियर संभाग के एक मंत्री जी आजकल मंत्रिमंडल से ज्यादा महल मंडल में रुचि ले रहे हैं। फाइलों के बोझ तले दबे उनके दफ्तर में सन्नाटा पसरा है, लेकिन मंत्री जी के मन-मस्तिष्क में बस एक ही धुन बज रही है—“महल की जय हो!”
अब साहब की व्यस्तता ऐसी है कि वे सरकारी योजनाओं की समीक्षा करने के बजाय महल की टाइल्स और झूमरों की चमक पर ज्यादा चिंतित हैं। फाइलें कब से टेबल पर धूल फांक रही थीं, किसी नेक बंदे ने ध्यान दिलाया तो मंत्री जी को भी एहसास हुआ कि अब कुर्सी भी धुंधली दिखने लगी है। समाधान भी तुरंत निकाल लिया—24/7 एक समर्पित समर्थक तैनात कर दिया, जिसकी नियुक्ति केवल फाइलों से धूल झाड़ने के लिए की गई है।
महल-मुग्ध मंत्री जी दिन-रात महल की भव्यता का गुणगान कर रहे हैं। कहते हैं, सोने से पहले भी वे “महल महिमा” का जाप करके ही आंख मूंदते हैं। राजधानी में साहब का दिल नहीं लगता, इसलिए क्षेत्र में एक केंद्रीय नेता का प्रभाव कम करने के लिए उन्होंने महल के चरणों में शरण ले ली है।
सूत्रों के मुताबिक, मंत्री जी ने अब “महल समर्पण योजना” पर भी काम शुरू कर दिया है, जिसमें वे खुद को पूर्ण रूप से महल को अर्पित करने की योजना बना रहे हैं। जनता की समस्याओं का समाधान? अरे भाई, महल की सेवा पहले!
“काना-फूसी” में आज इतना ही, अगली बार फिर हाजिर होंगे किसी और सियासी चटनी के साथ! पढ़ते रहिए द न्यूज़ एनालिसिस..













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