भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में मंडला जिले में हुए कथित नक्सली एनकाउंटर को लेकर विपक्ष ने सरकार पर आदिवासी युवक की फर्जी मुठभेड़ में हत्या करने का आरोप लगाया। कांग्रेस विधायकों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए पुलिस कार्रवाई को संदिग्ध बताया। उन्होंने सरकार से जवाब मांगते हुए कहा कि यदि मारा गया व्यक्ति नक्सली था, तो इसके ठोस प्रमाण सार्वजनिक किए जाएं।
गृह मंत्री की ओर से नरेंद्र शिवाजी पटेल ने सदन में जवाब देते हुए कहा कि मामले की मजिस्ट्रेट जांच 11 बिंदुओं पर जारी है। उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने पहले संदिग्ध को आत्मसमर्पण करने के लिए कहा था, लेकिन उसने फायरिंग कर दी, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी। मंत्री के बयान से असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों ने हंगामा किया और सदन से वॉकआउट कर दिया।
कांग्रेस के आदिवासी विधायक डॉ. हीरालाल अलावा ने भी इस एनकाउंटर को संदिग्ध बताया और मांग की कि इसकी जांच किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराई जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पुलिस की नाकामी छिपाने के लिए निर्दोष आदिवासियों को नक्सली बताकर मार रही है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को सड़क पर भी उठाने की चेतावनी दी।
इस सत्र में भाजपा विधायकों ने भी अपनी ही सरकार को घेरा। भिंड से भाजपा विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाहा ने बिजली कटौती और बिजली विभाग के भ्रष्टाचार को लेकर ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ शिकायत देने के बावजूद सरकार कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।
विधानसभा सत्र के बाहर भी राजनीति गर्म रही। मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए उन्हें 20 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा। सिंघार ने पलटवार करते हुए कहा कि वे सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाते रहेंगे और मंत्री के खिलाफ लोकायुक्त में शिकायत करेंगे।













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