मालवा के एक समय के धाकड़ बल्लेबाज, जिनकी राजनीति की स्विंग पूरे प्रदेश में चर्चा में थी, आज खुद को अपने ही गढ़ में चौके-छक्के लगाने तक सीमित पा रहे हैं। सुना है, अब उनके बेटे ने भी सुबह-शाम गढ़ की पिच पर बैटिंग प्रैक्टिस शुरू कर दी है। आखिर, जब पूरे सूबे में कप्तान साहब को इनकी बैटिंग रास नहीं आई, तो गढ़ के घरेलू मैदान पर ही रनों की बारिश करने की कोशिश चल रही है!
समय बदला, राजनीति की पिच बदली, और विरोधी खेमे के धुरंधर गेंदबाजों ने ऐसी बॉलिंग सेट कर दी कि अकेले खेलने वाले नेताजी को भी टीम स्पिरिट का महत्व समझ में आ गया। अब उन्होंने बेटे को नॉन-स्ट्राइकर एंड पर खड़ा कर दिया है, जबकि टीम के बाकी खिलाड़ियों को अलग-अलग फिल्डिंग पोजिशन सौंप दी है। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ये बैटिंग ऑर्डर बदला गया है या ये सिर्फ गढ़ बचाने की मजबूरी है?
मालवा की राजनीति की इस पिच पर कई खिलाड़ी आए और गए, लेकिन नियम सीधा है—जो मैदान छोड़ता है, उसके हाथ से न बल्ला बचता है, न गेंद। कप्तान को नाराज करने वाले को रन आउट होना पड़ता है। अब देखना यह होगा कि ये नई रणनीति राजनीति की इस टेस्ट मैच में कितने ओवर तक टिक पाती है। क्या यह साझेदारी लंबे समय तक चलेगी या फिर कप्तान साहब कोई नई रणनीति बनाकर इस जोड़ी को भी ड्रेसिंग रूम भेज देंगे?
राजनीति का यह मैच रोमांचक मोड़ पर है। भीतर के विपक्षी गेंदबाज नई बॉल के साथ तैयार हैं, कप्तान साहब भी रणनीति बदलने में माहिर हैं, और जनता अंपायर की भूमिका में बैठकर फैसले की घड़ी का इंतजार कर रही है। देखते हैं, ये इनिंग्स लंबी चलती है या जल्द ही कोई नया बल्लेबाज पैड बांधकर मैदान में उतरता है! आगे भी पढ़ते रहिए द न्यूज एनालिसिस की काना-फूसी में मजेदार किस्से!
Leave a Reply